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उभरते पहलवान सागर की हत्या पर पिता का दर्द

पहलवानी काफी लोगो को शौक है। ऐसे ही सागर भी एक उभरते पहलवान थे व सागर धनखड़ की हत्या को 16 दिन हो चुके हैं। हत्या का मुख्य आरोपी और दो बार का ओलिंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील अभी तक फरार है।

इंसाफ की आस में सागर के परिवार का सब्र जवाब देने लगा है। दिल्ली पुलिस में कार्यरत सागर के पिता अशोक और मामा आनंद ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस अधिकारियों से मिलकर कार्रवाई तेज करने की मांग की। पिता आज भी उस लम्हे को कोस रहे हैं, जब सुशील को देखकर सागर के मन में भी पहलवान बनने की ख्वाहिश पैदा हुई थी।

सागर के पिता का दर्द पढ़िए उन्हीं की जुबानी

2010 में सुशील ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। उसे स्टेडियम में तिरंगा लहराते देख सागर के दिल में भी पहलवान बनने की हसरत पैदा हुई। उसने सपना देखा था कि एक दिन वह भी ऐसे ही देश का नाम रोशन करेगा। यह सपना धीरे-धीरे मजबूत होता गया। बचपन के सारे शौक छोड़कर महज 15 साल की उम्र में वह मेरे साथ दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम पहुंच गया। सुशील उसके लिए आदर्श था। महाबली सतपाल के साथ-साथ सुशील को भी उसने गुरु मान लिया।

सागर ने जब जूनियर नेशनल में गोल्ड जीता तो मुझे लगा कि एक दिन वह भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकेगा। लेकिन ऐसा हो नहीं सका। चार मई को उसे पीट-पीटकर मार डाला गया। और हत्या का आरोप लगा भी तो किस पर? उसी सुशील पर, जो उसका आदर्श था। मैं तो आज उसी पल को कोस रहा हूं, जब सुशील को देख सागर ने भी पहलवानी की ठानी थी। सागर ही क्यों, दो दशक से हजारों युवा उसे देखकर ही तो पहलवान बने हैं। छत्रसाल स्टेडियम में सिर्फ मेरे बेटे की हत्या नहीं हुई।

उन हजारों पहलवानों और उनके माता-पिता के सपनों की भी हत्या हुई है, जो स्टेडियम को गुरु नगरी मनाते हुए निश्चिंत होकर अपने बच्चों को वहां ट्रेनिंग के लिए छोड़ आते हैं। अब हमारा भरोसा टूट रहा है। निर्दोष कभी भगोड़ा नहीं होता। मेरे बेटे को न्याय मिलना चाहिए। हम जब भी स्टेडियम में सागर से मिलने जाते, वह कहता कि मैं ओलिंपिक में मेडल जीतूंगा।’

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