Friday, 17 September, 2021

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…और प्रचार के आखिरी दिन लगी उपचुनाव पर रोक:धारूहेड़ा नगरपालिका का चेयरमैन चुने गए कंवर सिंह को हाईकोर्ट ने ठहराया योग्य, 6 महीने से खाली पड़ी कुर्सी के लिए उपचुनाव में 12 को होना था मतदान

राजस्थान से सटे रेवाड़ी जिले का कस्बा धारूहेड़ा शुक्रवार को एक अजीब स्थिति का हिस्सा बन गया। पिछले 6 महीने से खाली पड़ी नगर पालिका प्रधान की कुर्सी के लिए उपचुनाव की घोषणा हो चुकी थी और शुक्रवार को चुनाव प्रचार का आखिरी दिन था। यहां 12 सितंबर को मतदान होना था लेकिन चुनाव प्रचार का आखिरी दिन उस वक्त सलीके से आखिरी साबित हो गया, जब यहां चुनाव कराने पर ही रोक लगा दी गई। असल में निर्वाचन के बाद अयोग्य करार दिए गए कंवर सिंह को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने योग्य मान लिया है।

बता दें कि दिसंबर 2020 में हुई धारूहेड़ा नगर पालिका चेयरमैन चुनाव में कंवर सिंह ने जीत दर्ज की थी। उसके बाद उनकी मार्कशीट को लेकर विवाद हो गया। चुनाव आयोग को दी शिकायत में संदीप बोहरा के साथ-साथ चेयरमैन पद के सात अन्य उम्मीदवारों ने एफिडेविट देते हुए आरोप लगाए थे कि कंवर सिंह ने जो 10वीं मार्कशीट दिखाई है, वह सेंट्रल बोर्ड ऑफ हायर एजुकेशन से दर्शाई गई है और 2 जुलाई 1981 में परीक्षा पास की है। उस समय हरियाणा में इस तरह का कोई बोर्ड नहीं था। जिला प्रशासन से 10वीं मार्कशीट जांच होने तक शपथ नहीं दिलाने की मांग की थी।

उपायुक्त ने कागजात की जांच एसडीएम कोसली को सौंपी थी। इसमें एसडीएम की ओर से कंवर सिंह की मार्कशीट को हरियाणा बोर्ड के अनुसार वैध नहीं बताते हुए फर्जी करार दिया गया था। जांच रिपोर्ट चुनाव आयोग के पास भेजी गई थी। कंवर सिंह को चुनाव आयोग ने मार्च 2021 में कुर्सी पर बैठने से पहले ही उन्हें हटाकर नए सिरे से चुनाव कराने की घोषणा की थी।

27 अगस्त से धारूहेड़ा नगर पालिका चेयरमैन पद के लिए उप चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इधर अयोग्य करार देने के विरोध में निर्वाचित कंवर सिंह की ओर से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। कंवर सिंह का दावा है कि उनकी मार्कशीट सही है और जिसकी दिल्ली से वैरिफिकेशन हो चुकी है, ऐसे में मार्कशीट का फर्जी बताना गलत है।

कंवर सिंह की अपील के बाद हाईकोर्ट ने जबाव देने को कहा था। नव निवार्चित धारूहेड़ा के चेमरमैन कंवर की मार्कशीट को लेकर चुनाव के बाद फर्जी बता एफिडेविट देने वाले चेयरमैन पद के 8 उम्मीदवारों और पांच प्रशासनिक अधिकारियों को हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करके जबाव मांगा था। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने चेयरमैन के सर्टिफिकेट को योग्य करार देकर 15 मार्च 2021 को सुनाए गए फैसले का गलत साबित कर दिया है।

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