Friday, 17 September, 2021

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कंडम बसों की बोली:ई-ऑक्शन में 1.32 करोड़ में बिकी 88 कंडम एसी, सीएनजी व नॉन एसी बसें

रोडवेज के वर्कशॉप में 8 साल से ज्यादा समय से नीलामी का इंतजार कर रही रोडवेज की एसी, सीएनजी व नॉन एसी बसों की ई-अॉक्शन के जरिए नीलामी शुरू हो गई है। ई ऑक्शन के जरिए वर्कशाॅप में खड़ी 88 एसी, नॉन एसी व सीएनजी बसों को रिजर्व प्राइज से ऊपर की कीमत रोडवेज को मिली है। परिवहन विभाग ने नीलामी के जरिए 88 कंडम बसों को 1.32 करोड़ रुपए में बेचा है। ये कंडम बसों की नीलामी होने के बाद रोडवेज अधिकारियों ने राहत की सांस ली है।

वजह यह है कि पिछले चार साल में 5 बार बसों की ऑन स्पॉट नीलामी प्रक्रिया आयोजित होने के दौरान स्क्रैप कारोबारियों ने कंडम बसों को खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। इससे वर्कशॉप के कर्मचारियों को रूट पर जाने वाली बसों के मेंटेनेंस करने में परेशानी आती थी। इसके लिए वर्कशॉप प्रबंधन को बार बार अवगत कराया जा चुका था। उच्चाधिकारियों के संज्ञान में प्रकरण आने के बाद कंडम बसों की ई-ऑक्शन का फैसला लिया गया।

बुधवार को ई-ऑक्शन प्रक्रिया के जरिए 6 एसी बसें, 38 सीएनजी बसें और 44 सामान्य रोडवेज बसों की नीलामी कर दी गई। कंडम बसों के हट जाने के बाद वर्कशॉप में कर्मचारियों को रिपेयर के लिए आने वाली बसों का काम करने में सहूलियत होगी।

किमी स्कीम की बसों को फायदा पहुंचाने के फैसले की यूनियन ने निंदा की : हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन संबंधित सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य कार्यालय सचिव जयकुंवार दहिया ने कहा कि रोडवेज संकट के समय संजीवनी की तरह काम आती हैं। जैसे कोरोना काल में कोविड 19 के समय मेडिकल में एम्बुलेंस सेवा के रूप में, यूपी-बिहार तक प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने, रैली, धरने प्रदर्शन में मुख्य तौर पर इस्तेमाल होती है।

जबकि प्राइवेट समिति की बसों को या फिर किलोमीटर स्कीम की बसों को इस प्रकार से फ्री एवं जनहित में इस्तेमाल नहीं किया जाता। सरकार की ओर से कोरोना के समय किलोमीटर स्कीम की बसों को घर पर खड़े रहने के समय का भी रोडवेज विभाग की ओर से 9 रुपए 42 पैसे, 9 हजार एवं 12 हजार किलोमीटर के हिसाब से जो निर्णय लिया है। यूनियन इस फैसले की निंदा करती हैं। ऐसा करने से रोडवेज करोड़ों रुपए के घाटे में जाएगी।

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