Friday, 17 September, 2021

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करनाल में किसानों के लंगर पर आमने-सामने:सुखबीर का दावा- चढूनी ने फोन किया तो मैंने एसजीपीसी प्रधान की ड्यूटी लगाई; धरने में बैठे भाकियू नेता का पलटवार- झूठ बोल रहे हैं SAD प्रधान

करनाल में किसानों की प्रशासन के साथ मीटिंग बेनतीजा रही है। बुधवार को दूसरे दिन भी किसान करनाल सचिवालय के बाहर डटे रहे। इस दौरान किसानों के लिए चलाए जा रहे लंगर को लेकर अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल और हरियाणा के किसान नेता गुरनाम चढूनी आमने-सामने आ गए हैं। दरअसल सुखबीर बादल ने बुधवार दोपहर को बयान दिया कि करनाल में चल रहे प्रदर्शन के दौरान लंगर के लिए गुरनाम चढूनी ने उन्हें फोन किया था। इसके बाद उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की अध्यक्ष बीबी जागीर कौर से बात कर करनाल के गुरुद्वारों में किसानों के लिए लंगर और पानी का प्रबंध करने के लिए कह दिया। यही नहीं उन्होंने इसकी जानकारी सोशल मीडिया अकाउंट पर भी दी। दूसरी ओर गुरनाम सिंह चढूनी ने करनाल में सचिवालय के सामने ही चल रहे धरने के दौरान सुखबीर के दावों का खंडन किया है। चढूनी ने कहा कि उन्होंने लंगर के लिए कभी भी सुखबीर सिंह बादल को फोन नहीं किया और वह ऐसा क्यों करेंगे, जब समाज सेवी संगठन और गुरुद्वारा साहिब से लंगर किसानों के लिए बन रहा है। उन्हें नहीं पता है कि सुखबीर सिंह बादल इस तरह से बयान क्यों दे रहे हैं और इसके पीछे उनकी मंशा क्या है।

रैलियों के विरोध के बाद किसानों को मनाने की कोशिश में सुखबीर

सुखबीर बादल की तरफ से 100 दिन पंजाब के 100 विधानसभा यात्रा के लिए ‘गल पंजाब दी’ प्रोग्राम शुरू किया हुआ है। इस दौरान सुखबीर को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा और 8 दिन बाद ही प्रोग्राम रद्द करना पड़ा। साहनेवाल में तो उन्हें पैदल स्टेज तक जाना पड़ा था। मोगा में किसानों पर लाठीचार्ज भी हुआ था। इसके बाद सुखबीर बादल किसानों के लिए काफी प्यार दिखा रहे हैं। मुजफरनगर में हुई महापंचायत की तस्वीरें भी उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी कीं थीं। यही नहीं वह यहां तक घोषणा कर चुके हैं कि वह संयुक्त किसान मोर्चा के समक्ष हर सवाल का जवाब देने के लिए हाजिर होने को तैयार हैं।

रैलियां बंद करने की नसीहत दे चुके हैं किसान नेता

सुखबीर सिंह बादल द्वारा की जा रही जनसभाओं का संयुक्त किसान मोर्चा विरोध करता आ रहा है। बलवीर सिंह राजेवाल, मनजीत सिंह राय, रजिंदर सिंह दीप सिंह वाला जैसे कई नेता उन्हें नसीहत दे चुके हैं कि अभी चुनाव में समय बाकी है और सुखबीर सिंह बादल को अपनी जनसभाएं नहीं करनी चाहिए। इससे भाईचारक सांझ खराब होती है। उनका यह प्रोग्राम 10 सितंबर से फिर शुरू हो रहा है और इस दौरान वह किसान नेताओं को अपने पक्ष में करने का हर प्रयास कर रहे हैं।

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