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जानिए भारतीय क्रिकेट टीम के युवा युजवेंद्र चहल के जीवन के बारे में।

भारत के हरियाणा राज्य ने देश को कई ऐसी जानी-मानी हस्तियां दी है, जिन्होंने भारत का नाम रोशन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ऐसे ही हम बात करें यदि यूज़वेंद्र चहल की तो यह भी हरियाणा से ताल्लुक रखते हैं। यूजवेंद्र चहल ने क्रिकेट में आते ही तहलका मचा दिया व भारतीय टीम में एक नई ऊर्जा को स्थापित किया। इसलिए आज इस लेख में हम बात करने जा रहे है हरियाणा से जुड़े यूज़वेंद्र चहल के जीवन के बारे में। यदि आप भी जानना चाहते तो चलिए इस पूर्ण लेख के साथ।

1. यूज़वेंद्र चहल का जीवन परिचय

यजुवेंद्र चहल भारतीय क्रिकेट टीम का एक जाना माना नाम है। इनका जन्म 23 जुलाई 1990 को जींद हरियाणा में एक मध्यमवर्ग परिवार में हुआ था। वहीं दूसरी और बात करें उनके माता पिता जी की तो यूज़वेंद्र चहल के पिताजी के के चहल पेशे से वकील है और उनकी मां एक घरेलू महिला हैं। इसके साथ ही उनके परिवार में वह सबसे छोटे है व उनकी दो बड़ी बहने है जो ऑस्ट्रेलिया में रहती है। इनकी पत्नी धनश्री वर्मा हैं।

इनका कद करीब 5 फीट 6 इंच (1.68 मी॰) व इनकी बल्लेबाजी की शैली दाहिने हाथ से व गेंदबाजी की शैली राइट आर्म लेग ब्रेक गूगली।

2. यजुवेंद्र चहल की पढ़ाई

शिक्षा जीवन का आधार है और वहीं यदि हम बात करें यजुवेंद्र चहल की पढ़ाई की। तो उन्होंने अपनी पढ़ाई जींद के DAVC पब्लिक स्कूल से पूरी की थी। यजुवेंद्र का मन पढ़ाई में बिल्कुल नहीं लगता था लेकिन वह क्रिकेट और चेस को बहुत ही पसंद करते थे व इन खेलो को काफी खेलते भी थे। उन्होंने मात्र 7 साल की उम्र में ही चेस खेलना शुरू कर दिया और साथ ही क्रिकेट खेलने की शुरुआत भी कर दी थी।

3. यजुवेंद्र चहल चेस व क्रिकेट

यजुवेंद्र चहल अपने चेस खेलने के शौक व कठिन परिश्रम के कारण आगे बढ़ने लगे। इसी वजह से उन्हें मात्र 10 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर शतरंज में अपना जौहर दिखाने का मौका मिला। उन्होंने 2002 में राष्ट्रीय स्तर पर की जाने वाली बाल चेस प्रतियोगिता को जीत कर चैंपियन होने का खिताब अपने नाम किया। यह उनकी पहली राष्ट्रीय चैंपियन ट्रॉफी थी।

वहीं दूसरी ओर यदि बात करें यजुवेंद्र चहल के क्रिकेट खेलने की तो वर्ष 2006 में उनके करियर का सबसे खराब दौर आया। उन्हें अपने चेस गेम के लिए स्पॉन्सर मिलना बंद हो गया उनके सामने सबसे बड़ी समस्या आई वह थी पैसा। चैस ऐसा खेल था जिसमें उनका हर साल 50 से 60 हजार सालाना खर्चा होता था।

इतना पैसा न हो पाने की वजह से उन्होंने तय किया वे आगे चेस नहीं खेलेंगे। उसके बाद चहल ने क्रिकेट को ही अपना लक्ष्य बना लिया और क्रिकेट में ही मेहनत व कठोर परिश्रम करना शुरू कर दिया। इसके बाद चहल अपनी लाइफ में कभी मेहनत करने से नहीं चूके और देखते ही देखते क्रिकेट में उनका एक अच्छा करियर तय हो गया।

4. यजुवेंद्र चहल का टीम इंडिया तक का सफर

यजुवेंद्र चहल भारतीय क्रिकेट टीम का एक जाना माना नाम है और बात करें यदि उनके क्रिकेट टीम तक के सफर की। तो चहल की जिंदगी में आईपीएल एक बेहतरीन कड़ी साबित हुआ। चहल को पहली बार 2011 आईपीएल में मुंबई इंडियंस ने खरीदा था। चहल को 2011 के आईपीएल में खेलने का कुछ खास मौका नहीं मिला और वह आईपीएल में सिर्फ एक ही मैच में दिखाई दिए।

पर आपको बता दे कि चहल ने कभी हार नहीं मानी। अपने खेलों में और सुधार करना शुरू कर दिया। उसी मेहनत की वजह से वह चैंपियन लीग 20-20 में अपनी टीम की तरफ से सभी मैच खेलने का मौका ले पाए। जहां उन्हें हरभजन सिंह से एक गेंदबाज के तौर पर बहुत कुछ सीखने को मिला।

वाकई यजुवेंद्र चहल ने न सिर्फ हरियाणा का बल्कि अपने देश का नाम रोशन किया है।

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