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जानिए हरियाणा की बेटी कल्पना चावला के बारे में यह बाते

हरियाणा ने भारत देश का गौरव बढ़ने हेतु कई ऐसे नाम दिए है, जिनको याद करने भर से हमें अपने आप पे गर्व होता है। सरल शब्दों में कहे तो हरियाणा की काफी जानी मानी हस्तियों ने न सिर्फ हरियाणा का बल्कि पुरे देश का नाम रोशन किया है, जिनमे से कल्पना चावला एक है। जी हां, हरियाणा की बेटी कल्पना चावला को देश के सम्मान में बहुत याद किया जाता है। आज इस लेख में हम बात करने जा रहे है कल्पना चावला के जीवन के बारे में। यदि आप भी जानना चाहते है। तो चलिए इस पूर्ण लेख के साथ।

1. कल्पना चावला शुरुआती जीवन

इसमें कोई शक नहीं कि कल्पना चावला का नाम देश का बच्चा-बच्चा जानता है और यदि बात करें उनके प्रारम्भिक जीवन की तो भारत की महान बेटी कल्पना चावला करनाल हरियाणा भारत में पैदा हुई थी। उनका जन्म 17 मार्च सन 1962 में हुआ था उनके पिता का नाम श्री बनारसी लाल चावला और माता का नाम संजयोती देवी था। इसके साथ ही वह अपने परिवार के चार भाई बहनों में सबसे छोटी थी घर में सब उसे प्यार से मोंटू कहते थे।

1983 में उन्होंने उड़ान प्रशिक्षक जीन पिएर्र हैरिसन से विवाह किया था। इसके साथ ही कल्पना जब आठवीं कक्षा में थी तो उन्होंने इंजीनियर बनने की इच्छा प्रकट की उसकी मां ने अपनी बेटी की भावनाओं को समझा और आगे बढ़ने में मदद की। इसके साथ ही कल्पना में लगन और हौसला ज्यादा था। वह काम करने में बिल्कुल भी आलसी नहीं थी और न ही असफलता से घबराने वाली थी। जिसके नतीजे में वह अंतरिक्ष तक जा पहुंची थी।

2. शिक्षा

अब बात करे यदि कल्पना चावला की शिक्षा की तो उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा टैगोर पब्लिक स्कूल करनाल से प्राप्त की व उससे आगे की शिक्षा विमानिक अभियांत्रिकी में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज चंडीगढ़ से कर 1982 में अभियांत्रिकी स्नातक की उपाधि प्राप्त की।

इसके बाद कल्पना ने 1986 में दूसरी विज्ञान निशांत की उपाधि पाई और 1988 में कोलोराडो विश्वविद्यालय बॉर्डर से वैमानिक अभियांत्रिकी में विद्या वाचस्पति की उपाधि पाई। इतना ही नहीं कल्पना चावला जी को हवाईजहाज, ग्लाइडरों, व व्यावसायिक विमान चालन के लाइसेंसों के लिए प्रमाणित उड़ान प्राशिक्षिक का दर्जा हासिल था। कल्पना चावला अंतरिक्ष यात्री बनने से पहले वह एक सुप्रसिद्ध नासा के वैज्ञानिक थी।

3. कल्पना चावला का करियर

सन 1991 में कल्पना चावला ने अमेरिका की नागरिकता हासिल कर उन्होंने नासा एस्ट्रोनौट कोर्प के लिए आवेदन कर दिया। मार्च 1995 में उन्होंने नासा एस्ट्रोनौट कोर्प ज्वाइन कर लिया और उन्हें सन 1996 में पहली उड़ान के लिए चुना गया। उनकी पहली उड़ान अंतरिक्ष यान कोलंबिया (फ्लाइट संख्या एसटीएस-87) में 19 नवम्बर 1997 को प्रारंभ हुई। इस अंतरिक्ष यात्रा के दौरान कल्पना चावला समेत दल में कुल 6 सदस्य थे। इस उड़ान के साथ वे अंतरिक्ष की यात्रा करने वाली पहली भारतीय महिला और दूसरी भारतीय बन गयीं। इससे पहले भारत के राकेश शर्मा ने सन 1984 में अंतरिक्ष की यात्रा की थी। अपने पहली उड़ान में कल्पना चावला ने लगभग 1 करोड़ मील की यात्रा की (जो पृथ्वी के लगभग 252 चक्कर के बराबर था) व कुल 372 घंटे अंतरिक्ष में बिताये।

इस यात्रा के दौरान उन्हें स्पार्टन उपग्रह को स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी पर इस उपग्रह ने ठीक से कार्य नहीं किया जिसके स्वरुप इस उपग्रह को पकड़ने के लिए दो अंतरिक्ष यात्रियों विंस्टन स्कॉट और तकाओ दोई को अंतरिक्ष वाक करना पड़ा। इस गड़बड़ी की वजह जानने के लिए नासा ने 5 महीने तक जांच की जिसके बाद यह पाया गया कि यह गड़बड़ी कल्पना के वजह से नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर इंटरफ़ेस और फ्लाइट क्रू और ग्राउंड कण्ट्रोल के कार्यप्रणाली में खामियों के वजह से हुई थी। उनकी पहली अंतरिक्ष यात्रा (एसटीएस-87) के बाद इससे जुड़ी गतिविधियाँ पूरी करने के बाद कल्पना चावला को एस्ट्रोनॉट कार्यालय में ‘स्पेस स्टेशन’ पर कार्य करने की तकनीकि जिम्मेदारी सौंपी गयी।

सन 2002 में कल्पना को उनके दूसरे अंतरिक्ष उड़ान के लिए चुना गया। उन्हें कोलंबिया अंतरिक्ष यान के एसटीएस-107 उड़ान के दल में शामिल किया गया। कुछ तकनीकी और अन्य कारणों से यह अभियान लगातार पीछे सरकता रहा और अंततः 16 जनवरी 2003 को कल्पना ने कोलंबिया पर चढ़ कर एसटीएस-107 मिशन का आरंभ किया। उड़ान दल की ज़िम्मेदारियों में शामिल थे लघुगुरुत्व प्रयोग जिसके लिए दल ने 80 प्रयोग किए और जिनके जरिए पृथ्वी व अंतरिक्ष विज्ञान, उन्नत तकनीक विकास व अंतरिक्ष यात्री स्वास्थ्य व सुरक्षा का भी अध्ययन किया गया। कोलंबिया अन्तरिक्ष यान के इस अभियान में कल्पना के अन्य यात्री थे- कमांडर रिक डी. हुसबंद, पायलट विलियम सी मैकूल, कमांडर माइकल पी एंडरसन, इलान रामों, डेविड एम ब्राउन और लौरेल क्लार्क।

4. अंतरिक्षयान हादसा व कल्पना चावला की मृत्यु

अब बात करे उस पल की जिसमे कल्पना चावला ने दुनिया को अलविदा कह दिया था तो वह बेहद दर्दनाक हादसा था। सीधे शब्दों में कहे तो देश की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की दूसरी अंतरिक्ष यात्रा ही उनकी अंतिम यात्रा साबित हुई। अपने सभी अनुसंधान के उपरांत वापसी के समय कोलंबिया अंतरिक्षयान पृथ्वी के वायुमंडल मे प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया और देखते ही देखते अंतरिक्ष यान और उसमें सवार सातों यात्री खत्म हो गए।

जी हाँ, 1 फरवरी को कोलंबिया अंतरिक्ष यान पृथ्वी के परिमंडल में प्रवेश करते समय टेक्सास के ऊपर दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसके फलस्वरूप यान पर सवार सभी अंतरिक्ष यात्री मारे गए। नासा ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिये यह एक दर्दनाक घटना थी।

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