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पढ़िए पहलवान योगेश्वर दत्त के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातें

इसमें कोई शक नहीं कि हरियाणा पहलवानों की धरती मानी जाती है व यहां पर आप एक से बढ़कर एक पहलवान देख सकते हैं। जिन्होंने हरियाणा का नाम रोशन किया है। अभी हम बात करें यदि योगेश्वर दत्त के बारे में तो यह भी हरियाणा का एक जाना माना नाम है और कुश्ती को लेकर उन्होंने काफी नाम कमाया है।

हरियाणा का नाम योगेश्वर दत्त ने अपने कुश्ती के बलबूते ऊंचा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। आज इस लेख में हम बात करने जा रहे हैं योगेश्वर दत्त के जीवन से जुड़े कुछ तथ्यों के बारे में। तो लीजिए अपना समय और चलिए इस संपूर्ण लेख के साथ।

1. प्रारम्भिक जीवन

भारतीय कुश्ती में जाने-माने योगेश्वर दत्त का जन्म 2 नवंबर सन 1982 को हरियाणा के सोनीपत जिले में भैंसवाल कलां गांव में हुआ था। इसके साथ ही उनका परिवार काफी शिक्षित है, अर्थात उनके परिवार के सभी लोग काफी शिक्षित और अच्छी सोच वाले व्यक्ति है। योगेश्वर दत्त के पिता जी का नाम श्री राम मेहर है व माता का नाम श्रीमती सुशीला देवी है।

इनके दादा जी भी पेशे से शिक्षक है। योगेश्वर दत्त सबसे ज्यादा अपनी मां के करीब थे व उनकी मां न केवल एक अच्छी शिक्षक थी बल्कि वह उनके अच्छी दोस्त भी थी व उनको अच्छी सलाह देती थी। इसके साथ योगेश्वर दत्त का परिवार चाहता था कि वह उनके नक्शे कदम पर चले, लेकिन उनको बहुत कम उम्र से ही कुश्ती में रुचि होने लगी थी।

2. योगेश्वर दत्त की शिक्षा

पहलवानी में काफी नाम कमाने के साथ-साथ योगेश्वर दत्त ने शिक्षा भी ली है। योगेश्वर दत्त ने स्कूल स्तर पर कुश्ती में प्रदर्शन किया और कुछ प्रतियोगिताओं में जीत भी हासिल की है। उन्होंने अपनी पांचवी कक्षा में स्कूली चैंपियनशिप जीती और उसके बाद से उनके परिवार ने उनको कुश्ती को लेकर काफी समर्थन दिया।

सन 1996 में वे अपनी पढ़ाई पूरी कर कुश्ती पर और अधिक ध्यान देने लगे। योगेश्वर दत्त जब छोटे थे तब उन्होन गांव के एक पहलवान बलराज के करनामे देखे थे और कुश्ती कि तरफ काफी आकर्षित हुए थे।

3. करियर की शुरुआत

योगेश्वर दत्त बहुत कम उम्र में ही कुश्ती को लेकर गंभीरता से सोचने लगे थे वह कुश्ती कि तरफ काफी प्रभावित हुए थे जब उन्होंने अपने गांव में एक पहलवान के करतब देखे थे। सन 2003 में उन्होंने सही मायने में करियर की शुरुआत की। इस समय उन्होंने लंदन में आयोजित कॉमनवेल्थ कुश्ती चैंपियनशिप में 55 kg फ्रीस्टाइल वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।

वही सन 2004 के एथेंस ओलंपिक में भारतीय कुश्ती दल का हिस्सा बने और पुरुष के 55 kg फ्रीस्टाइल वर्ग में वह 18 नंबर पर रहे। अभी बात करें सन 2006 की तो यह वक्त उनके लिए काफी दुखदाई था। सरल शब्दों में कहें तो उन्होंने 2006 में अपने पिताजी को खो दिया था, वह भी तब जब वह दोहा में आयोजित एशियाई गेम्स के लिए गए हुए थे।

साथ ही उनको घुटनों में भी चोट लगी थी किंतु अपने सभी शारीरिक और भावनात्मक दुख भूल कर उन्होंने 60kg वर्ग में कांस्य पदक जीता। इसके बाद सन 2008 में योगेश्वर दत्त ने अपने जीवन का दूसरा ओलंपिक खेला। जी हां, बीजिंग ओलंपिक के लिए उन्होंने क्वालीफाई किया और स्वर्ण पदक जीता। परंतु यहीं पर वह 60kg फ्रीस्टाइल वर्ग में असफल रहे थे।

इसी प्रकार आगमी सालो में भी उन्होंने काफी नाम कमाया और पदक जीत वह अपने देश का गौरव बढ़ाते रहें।

4. योगश्वर दत्त पुरस्कार व उपलब्धियां 

बात करे यदि योगश्वर दत्त के पुरस्कार व उपलब्धियां की तो ओलंपिक गेम्स 2012 में लन्दन में उन्होंने 60kg फ्रीस्टाइल में कांस्य पदक जीता। वही उन्होंने एशियाई गेम्स 2006 दोहा (Doha) में 60kg फ्रीस्टाइल में कांस्य पदक जीता व 2014 में इन्चेओन(Incheon) में 65kg फ्रीस्टाइल में स्वर्ण पदक जीता। 

इसके साथ ही उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप, आदि में अन्य कई पुरस्कार जीते। इसके साथ ही उनको 2012 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार भारत सरकार द्वारा दिया गया व 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक के लिए हरियाणा सरकार की ओर से उनको ₹10 मिलियन नकद पुरस्कार में मिले। इसके अलावा भी वह काफी पदक व पुरस्कर हासिल कर चुके हैं।

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