Friday, 17 September, 2021

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पशुपालकों के लिए काम की खबर:‘वैज्ञानिक विधि से कृत्रिम गर्भाधान कराएंगे तो पैदा होगी बछिया’

पशुपालक दूध उत्पादन के लिए केवल मादा पशुओं के जन्म की कामना करते हैं क्योंकि नर पशु आज के युग में उनके व्यवसाय में कोई खास योगदान नहीं देते। ऐसी स्थिति में सैक्स्ड सीमन के प्रयोग से किसान मादा पशुओं (गायों) का उत्पादन कर सकते हैं। इस बारे में डॉक्टर सुजौय खन्ना विशेषज्ञ विस्तार शिक्षा निदेशालय लुवास उचानी करनाल ने बताया कि सैक्स्ड सीमन अब व्यापक रूप से उपलब्ध है और भारत में भी इस का प्रयोग बेहतर बछिया प्राप्त करने के लिए किया जा रहा है। पुल्लिंग वीर्य के रूप में सैक्स्ड सीमन का उपयोग लगभग न के बराबर है। बछियों में सैक्स्ड सीमन के उपयोग से अधिक लाभ मिलता है। इसके उपयोग से केवल बछियों का जन्म होता है और प्रसव के समय कठिनाई नहीं होती।

इसके ये हैं लाभ
सैक्स्ड सीमन के प्रयोग से केवल बछियों का जन्म होता है अतः दूध के उत्पादन में वृद्धि होती है और किसान को बछड़ों के लालन-पालन पर खर्च नहीं करना पड़ता। भारत में जो डेयरी की परिस्थिति है, उसमें सैक्स्ड सीमन का प्रयोग से अधिक लाभ होगा। पशुपालकों के पास अधिक बछिया होने से उसको बाहर से गायें नहीं खरीदनी पड़ेगी जिससे बिमारियों की रोकथाम में मदद मिलेगी। इसके अलावा गायों में भी कठिन प्रसव से राहत मिलती है।

कैसे सैक्स्ड सीमन से अधिक बछिया ही होती हैं?
वीर्य (सीमन) में दो प्रकार के शुक्राणु होते हैं: वाई क्रोमोसोम धारक शुक्राणु और एक्स क्रोमोसोम धारक शुक्राणु। जब नर का वाई क्रोमोसोम धारक शुक्राणु मादा के अंडे से मिलता है तो नर पशु का जन्म होता है। इसके विपरीत जब नर का एक्स क्रोमोसोम धारक शुक्राणु मादा के अंडे से मिलता है तो मादा पशु का जन्म होता है।

एक्स क्रोमोसोम का आकार और इसमें उपस्थित डीएनए की मात्रा वाई क्रोमोसोम की तुलना में ज्यादा होती है इसलिए फ्लोसाईटोमीटरी तकनीक से वीर्य में उपस्थित एक्स और वाई क्रोमोसोम धारक शुक्राणु को अलग किया जा सकता है। एक्स क्रोमोसोम वाले वीर्य के प्रयोग से मादा पशुओं का उत्पादन होता है और वाई क्रोमोसोम वाले वीर्य के प्रयोग से नर पशुओं का उत्पादन होता है। सीमन की सैक्सिंग (सैक्स्ड सीमन) से मन चाहे लिंग के पशुओं का प्रजन्न संभव हो गया है।

ये बरतें सावधानियांं
पाराम्परिक वीर्य की तुलना में सैक्स्ड सीमन में शुक्राणु की संख्या (लगभग 2 मिलियन प्रति डोज) बहुत कम होती है अतः इसके प्रयोग से गर्भाधारण की सम्भावना पाराम्परिक वीर्य से लगभग 10-15 प्रतिशत तक कम होती है। इसका प्रयोग उन क्षेत्रों में अधिक लाभकारी है जहां कृत्रिम गर्भाधान का काम अच्छा चल रहा है। स्वस्थ एवं सामान्य रूप से गर्मी में आने वाली बछियों में इसके प्रयोग से आपेक्षित नतीजे मिलते हैं। जहांं सामान्य वीर्ये की कीमत सरकारी अस्पतालों में 30 रुपए है, सैक्स्ड सीमन 200 रुपए हैं। पशु चिकित्सक से ही इसका प्रयोग पशु में गर्मी के लक्षण दिखाने पर कृत्रिम गर्भाधान करवाएं।

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