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भारतीय मुक्केबाज़ विजेंद्र सिंह के जीवन के बारे में जाने यह बाते

इसमें कोई शक नहीं की भारत में ऐसी कई महान हस्तियां है, जिन्होंने भारत के सम्मान में फूल बरसाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। सीधे शब्दों में कहे तो भारत देश के खिलाडी, जवानो, महान गायको, आदि ने भारत के सम्मान को निरन्तर बढ़ाने का प्रयास किया है।

अब ऐसे ही बात करे यदि हरियाणा के चर्चित मुक्केबाज़ विजेंद्र सिंह की तो इसमें कोई शक नहीं के वे विश्व भर में भारत के नाम को आगे जाने के लिए पूरा योगदान दिए हुए हैं। आज इस लेख में हम बात करने जा रहे हैं, हरियाणा के बेटे, महान मुक्केबाज़ विजेंद्र सिंह के बारे में। जिसे जानकर आप बेहद अच्छा महसूस करेंगे, तो चलिए इस संपूर्ण लेख के साथ।

1. प्रारम्भिक जीवन 

विजेंद्र सिंह भारत देश के जाने माने ओलम्पिक बॉक्सर हैं व काफी लोगो के लिए प्रेरणा का स्त्रोत भी हैं। अब बात करे यदि विजेंद्र सिंह की जन्म की तो उनका जन्म 29 अक्टूबर 1985 को हरियाणा के भिवानी से 5 किलोमीटर दूर कालूवास गांव में एक जाट परिवार में हुआ था। वही बात करे यदि उनके पिता की तो उनके पिता महिपाल सिंह बेनीवाल हरियाणा रोडवेज़ में बस ड्राईवर हैं। वही विजेंद्र सिंह की माताजी एक गृहणी हैं।

विजेंदर के पिता जी विजेंदर और उनके बड़े भाई मनोज की शिक्षा के लिए ओवरटाइम वेतन के लिए अतिरिक्त काम करते थे। वही विजेंद्र सिंह की शादी 2011 में अर्चना सिंह के साथ हुई है। विजेंद्र एक बेहद ही निम्न मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। 

2. विजेंद्र सिंह की शिक्षा

शिक्षा मनुष्य के जीवन का आधार है। अब वही यदि बात करे हरियाणा के महान मुक्केबाज़ विजेंद्र सिंह की पढाई की तो विजेंद्र सिंह ने अपनी स्कूलिंग भिवानी से ही पूरी की है। उनकी स्नातक भिवानी के वैश्य कॉलेज से पूरी हुई है।

वही विजेंद्र सिंह को मुक्केबाज़ी व कुश्ती का शौक कॉलेज की दिनों से ही था और वह अपने खेलो की प्रैक्टिस भिवानी बॉक्सिंग क्लब में करते थे। उन्होंने कोचिंग का प्रशिक्षण भारतीय बॉक्सिंग कोच गुरबक्श सिंह संधू से लिया हैं।

3. मुक्केबाज़ी करियर 

विजेंद्र सिंह ने अपना करियर महान बनाने के लिए खूब मेहनत की है व सफलता को हासिल भी करके दिखाया है। उन्हीने अपनी कुश्ती व मुक्केबाज़ी को लेकर देश का कई बार नाम रोशन किया है व देश के लिए कई सरे पुरुस्कार भी जीते है। विजेंद्र सिंह ने प्रशिक्षण भिवानी बॉक्सिंग क्लब में लिया था। उन्होंने पहली पहचान तब पाई जब उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में एक बाउट जीती। 1997 में उन्होंने पहले सब-जूनियर नेशनल में रजत पदक जीता और 2000 नेशनल में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता।

2003 में, वह अखिल भारतीय युवा मुक्केबाजी चैंपियन बने। यदि बात करे सबसे महत्वपूर्ण मोड़ की तो, उनका सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 2003 के एफ्रो-एशियाई खेलों में आया। एक जूनियर मुक्केबाज होने के बावजूद, विजेंदर ने चयन ट्रायल में भाग लिया और उन्हें उस प्रतियोगिता के लिए चुना गया जहां उन्होंने रजत पदक जीतने के लिए बहादुरी से संघर्ष किया।

4. फ़िल्मी करियर 

इसमें कोई शक नहीं के विजेंद्र सिंह की एक अच्छी खासी पेर्सनलिटी है व उन्होंने अपनी अच्छी पर्सनालिटी के चलते अभिनय में भी अपनी किस्मत आजमाई। जी हाँ, उन्होंने अक्षय कुमार निर्मित फिल्म फग्ली से हिंदी सिनेमा में अभिनय का डेब्यू किया था व  काफी लोगो ने इस फिल्म को देखा था। बात करे यदि फिल्म की पृष्ठकथा की तो इस फिल्म की पृष्ठकथा चार दोस्तों के ऊपर आधारित थी। फिल्म ने बॉक्स-ऑफिस पर ठीक-ठाक कारोबार किया था।

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