हरियाणा का नाम तुरंत एक ऐसे राज्य की छवि बनाता है, जो आश्चर्यजनक रूप से प्राचीनता और बहुत कुछ को जोड़ती है। हरियाणा की वैदिक भूमि भारतीय संस्कृति और सभ्यता का आधार रही है। भारतीय परंपराएं इस क्षेत्र को उत्तरी वेदी के निर्माण के मैट्रिक्स के रूप में मानती हैं ‘जहां ब्रह्मा ने प्राचीन बलिदान का प्रदर्शन किया और ब्रह्मांड का निर्माण किया। 1915 में गाइ ई। पिलग्रिम द्वारा की गई पुरातात्विक जांचों से निर्माण के इस सिद्धांत की काफी हद तक पुष्टि हो गई है, जिसने 15 मिलियन साल पहले स्थापित किया था कि शुरुआती आदमी हरियाणा शिवालिकों में रहते थे। वामन पुराण में कहा गया है कि राजा कुरु ने भगवान शिव के नंदी द्वारा खींची गई सोने की खुरपी के साथ कुरुक्षेत्र के मैदान में प्रतिज्ञा की और सात कोस का क्षेत्र पुनः प्राप्त किया। मिथकों, किंवदंतियों और वैदिक संदर्भों से परिपूर्ण, हरियाणा का अतीत गौरवशाली है। इसी धरती पर संत वेद व्यास ने महाभारत लिखी थी। महाभारत के महान युद्ध के सेट पर भगवान कृष्ण ने अर्जुन के प्रति कर्तव्य का सुसमाचार प्रचार करते हुए 5,000 साल पहले यहां कहा था: “तुम्हारा अधिकार अपने कर्तव्य को निभाना है और उसके फल (outcome) के बारे में परेशान नहीं करना है!” तब से, कर्तव्य की सर्वोच्चता का यह दर्शन सफल पीढ़ियों के लिए एक बीकन बन गया है।

हरियाणा का इतिहास

हरियाणा का नाम लेते ही हमारे मस्तिष्क में एक ऐसे प्रदेश की छवि उभर आती है जिसके ऐतिहासिक अवशेष अत्यंत समृद्ध हैं।भारतीय परंपराओं में इस क्षेत्र को सृष्टि की आधात्री की मान्यता दी जाती है। जहां ब्रह्मा ने प्रथम यज्ञ करके सृष्टि का सृजन किया था। हरियाणा का गौरवपूर्ण अतीत अनेक मिथकों, किंवदंतियों और वैदिक संदर्भों से भरा हुआ है।महर्षि वेदव्यास ने इसी पावन धरा पर महाभारत काव्य की रचना की थी। पांच साल पहले यहीं पर महाभारत के युद्ध में भगवान श्री कृष्णा ने अर्जुन को गीता का दिव्य संदेश देकर कर्तव्य बोध कराया था। हरियाणा क्षेत्र अनेक युद्धों का साक्षी रहा है क्योंकि यह उत्तर भारत का प्रवेश द्वार है। वास्तव में हरियाणा का इतिहास साहसी धर्म नष्ट और गौरवशाली लोगों के संघर्ष की गाथा सुनाता है।प्राचीनकाल से ही हरियाणा के बहादुर लोगों ने बड़े साहस के साथ विदेशी आक्रमणकारियों की सेनाओं का डटकर मुकाबला किया।हरियाणा के वीरों ने सदैव ही राष्ट्रविरोधी शक्तियों का डटकर मुकाबला किया है। हरियाणा का समाज सदैव विभिन्न जातियों संस्कृतियों और धर्मों का मिश्रण रहा है। हरियाणा की भूमि पर ही ये सब मिले, आपस में एक-दूसरे से जुड़े और एक सच्चे भारतीय बनकर निखरे। यहीं पर हिन्दू संतों और सिख गुरुओं ने विश्व प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। हरियाणा विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से विकास करते हुए अग्रणी राज्य बन गया है।

किसानों का राज्य- हरियाणा

भारत के सभी राज्यों में से हरियाणा एक ऐसा राज्य है जो कि भारत के उत्तर-पश्चिम में स्थित है और यह एक संपन्न राज्य है। जिसकी राजधानी चंडीगढ़ है। इसका गठन 1 नवंबर वर्ष 1967 को पंजाब राज्य से अलग करके बनाया गया था। हरियाणा के विषय में वैदिक साहित्य में अनेक उल्लेख हैं। ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक इकाई के रूप में हरियाणा का अस्तित्व देवताओं से हुआ था। इसलिए इसे ‘ब्रह्मा व्रर्त’ का नाम दिया गया था। इस प्रदेश में की गई खुदाईयों से यह ज्ञात होता है कि सिंधु घाटी सभ्यता और मोहनजोदड़ों संस्कृति का विकास यहीं पर हुआ था। इस राज्य को ब्रह्मा की ‘उत्तर वेदी’ के नाम से भी पुकारा गया।इस राज्य को सृष्टि का जन्म स्थान भी माना जाता है। यह भी मान्यता है कि मानव जाति की उत्पत्ति जिन वैवस्तु मनु से हुई, वे इसी प्रदेश के राजा थे।हरियाणा के लोग ज्यादातर खेती करते हैं और यहां के लोग ज्यादातर सेना में भी भर्ती होते हैं। हरियाणा राज्य प्रमुख भाषाएं हरियाणवी एवं पंजाबी हैं।हरियाणा को अक्सर फूड बाउल ऑफ इंडिया भी कहा जाता है। यह भारत के उन राज्यों में से है जहां आधे से अधिक आबादी खेती और कृषि में व्यस्त है। दुनिया भर में हरियाणा को चैंपियन की भूमि के रूप में जानते हैं क्योंकि हरियाणा के एथलीट और खिलाड़ी भारत के अन्य राज्यों की तुलना में ज़्यादा पदक प्राप्त करते हैं या जीते हैं। भारत में सबसे ज्यादा ग्रामीण करोड़पति भी इसी राज्य में है।हरियाणा दक्षिण एशिया के सबसे आर्थिक रूप से विकसित क्षेत्रों में से एक है। हरियाणा भारत के अमीर राज्यों में से एक है और प्रति व्यक्ति आय के आधार पर यह देश का दूसरा सबसे धनी राज्य है।