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हरियाणा सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की अवधारणा से एक कदम आगे जाकर ‘ईज ऑफ लिविं…


हरियाणा सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की अवधारणा से एक कदम आगे जाकर ‘ईज ऑफ लिविंग’ के कॉन्सेप्ट को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है । इसी कड़ी में अब वाहन पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया को ‘फेसलेस’ बनाने और इसमें मानवीय हस्तक्षेप की किसी भी गुंजाइश को खत्म करने के मकसद से सरकार ने प्रदेश में पूरी तरह से निर्मित नए परिवहन वाहनों का पंजीकरण डीलरों के माध्यम से करवाने का निर्णय लिया है।
परिवहन मंत्री श्री मूलचंद शर्मा ने आज बताया कि प्रदेश में अब नए वाहनों के पंजीकरण के लिए डीलरों को सम्बन्धित पंजीकरण प्राधिकरण को सभी दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन करना होगा। डीलर को पंजीकरण प्राधिकरणों के पास दस्तावेजों या फाइलों की हार्ड कॉपी भेजने की भी आवश्यकता नहीं है। सम्बन्धित पंजीकरण प्राधिकरण परिवहन पोर्टल पर वाहनों के ऑनलाइन जमा करवाए गए दस्तावेजों या विवरण की ही जांच करेंगे।
श्री मूलचंद शर्मा ने बताया कि प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरणों द्वारा उनके अधिकार-क्षेत्र में पडऩे वाले डीलरों द्वारा ऑनलाइन जमा करवाए गए वाहनों के आवेदन, दस्तावेजों तथा विवरण के आधार पर ही नए गैर-परिवहन और नए पूरी तरह से निर्मित परिवहन वाहनों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि आरटीए द्वारा डीलरों पर दस्तावेजों या फाइलों की हार्ड कॉपी जमा करवाने के लिए दबाव नहीं डाला जाएगा। डीलरों द्वारा आवेदन व दस्तावेज ऑनलाइन जमा करवाने के साथ-साथ डीलर प्वाइंट रजिस्ट्रेशन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी)का पालन किया जाएगा।
परिवहन मंत्री ने बताया कि गत 15 जून को मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने प्रदेश में पूरी तरह से निर्मित नए परिवहन वाहनों का पंजीकरण डीलरों के माध्यम से करवाने का अहम निर्णय लिया है। अब वाहन मालिक अपने पूर्ण रूप से निर्मित नए परिवहन वाहनों को संबंधित डीलर के माध्यम से पंजीकृत करवा सकेंगे। इससे पंजीकरण प्राधिकरणों के कार्यालयों में लोगों की आमद में उल्लेखनीय कमी आएगी।
उन्होंने बताया कि पिछले 7 वर्षों में डीलर प्वाइंट रजिस्ट्रेशन के माध्यम से 48.80 लाख से अधिक नए निजी वाहन पंजीकृत किए गए हैं। इसकी सफलता से उत्साहित होकर, फेसलैस और कैशलैस तरीके से कारोबारी सुगमता में सुधार के दृष्टिगत अब इस सिस्टम का विस्तार पूरी तरह से निर्मित परिवहन वाहनों के लिए किया जा रहा है।


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